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Thursday, 11 February 2016

नहीं रहे सियाचिन के 'शेर' हनुमनथप्पा, दिल्ली के आर.आर हॉस्पिटल में हुआ निधन

सियाचिन में छह दिनों तक 35 फुट बर्फ के नीचे दबे होने के बावजूद जिंदा बचे लांसनायक हनुमनथप्पा कोप्पाड की दिल्ली के आर.आर. हास्पिटल में निधन हो गया। उनके दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही था जिससे उनकी हालत और बिगड़ती गई। हनुमंथप्पा ने दिल्ली के आर्मी अस्पताल में गुरुवार को 11.45 बजे आखिरी सांस ली। 



उन्हें निमोनिया और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। सियाचिन ग्लेशियर में बर्फ खिसकने से 35 फुट नीचे दबे रहने के बाद जीवित निकाले गये लांस नायक हनमंथप्पा जीवन के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करते रहे। हनुमनथप्पा को सियाचिन ग्लेशियर से आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल लाया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने अस्पताल जाकर बहादुर सैनिक से मुलाकात की थी और देश से उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करने को कहाल था।
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Wednesday, 10 February 2016

भोजशाला में पूजा और नमाज को लेकर बढ़ा तनाव

मध्य प्रदेश के धार में तनाव बढ़ गया है, यहां पर भोज उत्सव समिति और हिंदू जागरण मंच ने भोजशाला में वसंत पंचमी पर सुबह 7.30 से रात 8.30 बजे तक कार्यक्रम करने का ऐलान किया है। भोज उत्सव समिति का कहना है कि अगर उन्हें पूरे दिन पूजा नहीं करने दी गई तो भोजशाला के बाहर ज्योति मंदिर में पूजा करेंगे। इस बीच मंदिर परिसर में हवन कुंड के लिए ईट और लेपन सामग्री रखवा दी गई। आयोजन समिति की इस तैयारी से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है ।



इंदौर संभाग के आयुक्त (राजस्व) संजय दुबे ने कहा, ‘हम 12 फरवरी को भोजशाला परिसर में एएसआई के आदेश का पालन कराएंगे। हम इस आदेश के मुताबिक हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को भोजशाला परिसर में तय समय पर ही उनकी धार्मिक परंपराओं का पालन करने देंगे।’ भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अफसर ने कहा, ‘भोजशाला केंद्र सरकार के अधीन एएसआई का संरक्षित स्मारक है। लिहाजा हमारी जिम्मेदारी है कि हम एएसआई के 12 फरवरी के मद्देनजर जारी सरकारी आदेश का पालन कराएं। हमारे पास इस आदेश का पालन कराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।’

ऑर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया एएसआई ने बसंत पंचमी पर दिन भर पूजा, आरती की इजाजत हिंदुओं को दी है लेकिन बीच में दोपहर में एक से तीन बजे तक मुसलमान जुमे की नमाज अदा करेंगे। इस दो घंटे के दौरान भोजशाला के अंदर पूजा अर्चना नहीं होगी। जिस जगह हिंदू मुस्लिम दोनों की इतनी आस्था है क्या खास है उस जगह में।

दरअसल ये भोजशाला 11 वीं सदी में राजा भोज ने बनाई थी। उसके बाद मुस्लिम हुकमरान आए और कमाल मौला मस्जिद बन गई लेकिन हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करते हुए यहां नमाज भी होती रही और वागदेवी यानि देवी सरस्वती की पूजा भी होती रही लेकिन हर साल बसंतपंचमी पर भोजशाला युद्ध शाला मे तब्दील हो जाती है।

ग्यारहवी सदी में मालवा इलाके में राजा भोज का राज था। राजा भोज की आराध्य देवी मां सरस्वती थीं। कहा जाता है कि राजा भोज ने सरस्वती की स्फटिक की बनी मूर्ति स्थापित की थीं। उस जमाने में वागदेवी के इस मंदिर में चालीस दिन का विशाल बसंतोत्सव मनाया जाता था। मध्यकाल में मुस्लिम शासकों के वक्त ये सिलसिला टूटा। मगर करीब पैंसठ साल से धार की भोज उत्सव समिति ने ये सिलसिला कायम रखा है।
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मुगल गार्डन की सैर करनी है तो इन तारीखोें में जायें राष्ट्रपति भवन


खूबसूरत फूलों, दुर्लभ प्रजाति के पेड-पौधों और जड़ी-बूटियों के लिये मशहूर राष्ट्रपति भवन का मुगल गार्ड कल यानी 12 फरवरी से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। 



मुगल गार्डन्स इस साल पब्लिक के लिए 20 मार्च तक खुला रहेगा। सोमवार को छोड़ कर आम लोग किसी भी दिन सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच मुग़ल गार्डन देखने जा सकते हैं। 



मुगल गार्डन्स के लिए एंट्री और एग्जिट नार्थ एवेन्यू की तरफ से गेट नम्बर 35 से होगी। मुगल गार्डन के एक ही बगीचे में 120 से ज्यादा तरह के गुलाब एक साथ खिलते हैं। दुर्लभ माने जाने वाला काला और हरे रंग गुलाब भी यहां देखने को मिलता है। 



इसके अलावा 125 प्रकार के गुलदाउदी,50 से अधिक किस्म के बोगनविलिया और दुनियाभर में पाए जाने वाले सभी तरह के मैरीगोल्ड (गेंदे) के फूल भी एक ही गार्डन में मौजूद हैं। 



मुगल गार्डन की एक खास बात यह भी है कि कई किस्म के फूलों के नाम मशहूर हस्तियों पर रखे गए हैं। जैसे मदर टेरेसा, अर्जुन, भीम, राजा राम मोहन, जवाहर। 




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भूत बन करते थे बॉर्डर की रक्षा, मरने के बाद भी मिलती थी इन्हें छुट्टियां

144 घंटे तक 35 फीट मोटी बर्फ के नीचे दबे रहने के बाद भी जिंदा बचे शियाचिन का शेर हनुमनथप्पा अभी कोमा में हैं। उनके बचने की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन भारत के जवान से जुड़ी एक और चमत्कार है जिसकी कहानी हम अभी बता रहे हैं। कहानी है एक ऐसे भारतीय सेना के जवान की जो शहीद होने के बाद भी सरहद पर एक फौजी के रूप में देश की रक्षा कर रहे हैं।



ऐसा माना जाता है कि यह शहीद आज भी वहां तैनात फौजियों को दिखाई देते हैं और अपना संदेश पहुंचाने के लिए साथी फौजियों के सपने में आकार अपनी इच्छा बताते हैं। भारत-चीन सीमा पर तैनात कई फौजी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं, यही नहीं चीन के सिपाहियों ने भी इस फौजी को अपनी आंखों से घोड़े पर गश्त करते देखा है।

भारत-पाक फ्लैग मीटिंग में रखी जाती है कुर्सी -
उन सबका मानना है की पंजाब रेजिमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालो से लगातार देश की सीम की रक्षा कर रही है। सैनिको का कहना है की भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की एक खाली कुर्सी लगाईं जाती है ताकि वो मीटिंग अटेंड कर सके।



कैसे हुई मौत -
 हरभजन सिंह 24वीं पंजाब रेजिमेंट के जवान थे। एक दिन जब वो खच्चर पर बैठ कर नदी पार कर रहे थे तो खच्चर सहित नदी में बह गए। नदी में बह कर उनका शव काफी आगे निकल गया। दो दिन की तलाशी के बाद भी जब उनका शव नहीं मिला तो उन्होंने खुद अपने एक साथी सैनिक के सपने में आकर अपनी शव की जगह बताई।

सवेरे सैनिकों ने बताई गई जगह से हरभजन का शव बरामद अंतिम संस्कार किया। हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिको की उनमे आस्था बढ़ गई और उन्होंने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया।



आज भी देते है ड्यूटी -
बाबा हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से लगातार ही अपनी ड्यूटी देते आ रहे है। इनके लिए उन्हें बाकायदा तनख्वाह भी दी जाती रही है। नियमानुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता रहा है। यहां तक की उन्हें कुछ साल पहले तक 2 महीने की छुट्टी पर गाँव भी भेजा जाता था। इसके लिए ट्रेन में सीट रिज़र्व की जाती थी, तीन सैनिको के साथ उनका सारा सामान उनके गाँव भेजा जाता था तथा दो महीने पूरे होने पर फिर वापस सिक्किम लाया जाता था।

जिन दो महीने बाबा छुट्टी पर रहते थे उस दरमियान पूरा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था क्योकि उस वक़्त सैनिको को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी। लेकिन बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था जिसमे की बड़ी संख्या में जनता इकठ्ठी होने लगी थी।

कुछ लोगो इस आयोजान को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते थे इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया क्योंकि सेना में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास की मनाही होती है। लिहाज़ा सेना ने बाबा को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया।



मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिसमे प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाए जाते हैं। बाबा की सेना की वर्दी और जुते रखे जाते है। कहते है की रोज़ पुनः सफाई करने पर उनके जूतों में कीचड़ और चद्दर पर सलवटे पाई जाती है।

लोगो की आस्था का केंद्र है मंदिर बाबा हरभजन सिंह का मंदिर सैनिको और लोगो दोनों की ही आस्थाओ का केंद्र है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यदि इस मंदिर में बोतल में भरकर पानी को तीन दिन के लिए रख दिया जाए तो उस पानी में चमत्कारिक औषधीय गुण आ जाते है। इस पानी को पीने से लोगो के रोग मिट जाते है।
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Tuesday, 9 February 2016

6 दिन दबे रहे बर्फ में, योग व जज्बे से बचे हनुमनथप्पा!

दुनिया के सबसे ऊंचे लड़ाई के मैदान सियाचीन ग्लेशियर में 6 दिन तक बर्फ में दबे होने के बावजूद जिंदा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। 3 फरवरी को सियाचिन के उत्तरी ग्लेशियर में बर्फीले तूफान में दबे मद्रास रेजीमेंट के लांस नायक हनुमनथप्पा इस समय दिल्ली के आर.आर हास्पिटल में भर्ती हैं।


रक्षा विशेषज्ञ बता रहे हैं कि ऐसा चमत्कार सेना की कठोर ट्रेनिंग, योग और विपरीत परिस्थितियों में जिंदा रहने की अदम्य इच्छा से ही संभव हुआ। लांस नायक हनुमनथप्पा माइनस 45 डिग्री सेल्सियस के हांड़ गला देने वाली सर्दी में बर्फ में 25 फीट नीचे छह दिन तक दबे होने के बावजूद जिंदा निकले, तो यह अदम्य जिजीविषा का भी नतीजा है।

सोनम पोस्ट पर सेना के बचाव दल ने सोमवार देर रात हनुमनथप्पा को बर्फ काटकर बाहर निकाला। उनका फाइबर युक्त तंबू ध्वस्त हो चुका था। मेडिकल टीम यह देखकर हैरान रह गई कि हनुमन की सांसें चल रही थीं। हालांकि नाड़ी बेहद धीमी थी। हालत बहुत खराब थी और शरीर में पानी की कमी थी। उन्हें वहीं प्राथमिक चिकित्सा दी गई। फिर साल्तोरो रिज स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे हैलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिये बेस कैंप लाया गया। विशेष ऑपरेशन में 150 जवानों के अलावा डॉट व मीशा नाम के दो खोजी कुत्तों ने भी अहम भूमिका निभाई। इन सब ने मिलकर असंभव को संभव कर दिया।
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